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मानव गीत स्वीकार चाँद मोहब्बत बन जाती है मोती छोड़ गेह निज बाहर आप्रवासी कब निज ठांव प्रभाव त्यागना अनुकूल अनपढ़ उत्प्रवासी बदलेगा माँ प्रवास ज्ञान

Hindi बदलेगा ठांव Poems